भ्रामरी प्राणायाम का नाम भ्रामरी मधुमखी के नाम से पड़ा है। भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास के दौरान मधुमखी की आवाज निकलती है, इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते है। इस प्राणायाम के अभ्यास से हमारा मन और मस्तिष्क शांत होता है। आपको बता दें भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास बहुत ही आसान है। इस प्राणायाम के अभ्यास से हम अपने क्रोध, चिंता को आसानी से दूर कर सकते है। यह प्राणायाम एक साधारण प्रक्रिया है। जिसे हमें कहीं भी कर सकते है। मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए भ्रामरी एक अच्छा विकल्प है।

भ्रामरी प्राणायाम हमारी मस्तिष्क तंत्रिकाओं के साथ-साथ हमें विशेष लाभ देता है। इस प्राणायाम की ध्वनि हमें प्राकृतिक शांति का अहसास करती है। भ्रामरी प्राणायाम के अभ्यास के लिए सबसे पहले आप किसी शांत वातावरण में बैठे जहाँ हवा का प्रवाह बेहतर हो। इस दौरान अपने मन को शांत रखें। अब धीरे-धीरे अपनी आँखों को बंद कर अपने शरीर में शांति को महसूस करें। इसके बाद अपनी तर्जनी को अपने कानों पर रखें और अपने कान-गाल की त्वचा के बीच की उपास्थि में अपनी ऊंगलियाँ रखें। अब धीरे-धीरे लंबी साँस लें और छोड़ें। इस दौरान आप अपने उपास्थि को दबाएँ रखें। इस क्रिया को करते समय मधुमक्खी की आवाज़ निकलती है। हाँ याद रहें आपकी ध्वनि जितनी ऊँची होगी आपको लाभ उतना अधिक मिलेंगा। इस क्रिया का अभ्यास दिन में 2-3 बार कर सकते है।

भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास आप प्रातः व्यायाम के साथ कर सकते है। इस प्राणायाम के दौरान आप अपने पीठ के बल लेट कर दाहिनी ओर करवट लेकर भी कर सकते है। इस अभ्यास के दौरान अपने मुंह से गिलगिलने की आवाज़ निकलती है। इसका अभ्यास 4-5 बार करें। इसके अभ्यास से हमारी चिंता व हमारा क्रोध कम होता है। हाइपरटेंशन बीमारी के मरीजों के लिए भ्रामरी प्राणायाम अत्यंत लाभदायक है। अगर आपको ज्यादा गर्मी लगती है या आपका हमेशा सिरदर्द रहता है, तो प्राणायाम अपने लिए बहुत की फायदेमंद है। भ्रामरी प्राणायाम माइग्रेन रोगियों के लिए भी लाभदायक है। इसके अभ्यास से हमारी बुद्धि तीक्ष्ण व हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके नियमित अभ्यास से हमारा उच्च रक्त चाप भी सामान्य होने लगता है। भ्रामरी प्राणायाम के दौरान अपनी ऊँगली उपास्थि पर ही रखें और उपास्थि को जोर से ना दबाएँ। मुँह को बंद रखें। हाँ इस दौरान अपने उँगलियों को षण्मुखी मुद्रा में रखें। इस दौरान अपने चेहरे दबाव में ना डालें। भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास 4-5 से अधिक बार ना करें। अगर आप किसी बीमारी से ग्रस्त है, तो बिना डॉक्टर की सलाह से इस प्राणायाम का अभ्यास ना करें। भ्रामरी प्राणायाम के दौरान आप ओम का उच्चारण कर सकते है। 

इस प्राणायाम का अभ्यास बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक कोई भी आसानी से कर सकता है। हाँ व्यायाम व प्राणायाम का अभ्यास खाली पेट करना बहुत ही सही है। अगर आप व्यायाम और ध्यान के बारे में विस्तार से जानना चाहते है, तो eka Meditation ऐप्प को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।  

No responses yet

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *