बालासन यानि शिशु आसन है। इस आसन में हम अपने शरीर को एक शिशु की भांति वज्र आसन में ले जाकर अपने हाथों व शरीर को आगे की ओर झुकाते है। इस आसन का अभ्यास करना बेहद ही आसान है। इसके हमारे शरीर को कई लाभ हैं। यह आसन हमारी कमर की मांसपेशियों को आराम देता है और हमें कब्ज जैसी बीमारियों से बचाता है। इस आसन का नियमित अभ्यास करने से हमारा मन शांत होता है। बाल शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है। जिसका अर्था- बच्चा और शिशु होता है। आसन का अर्थ- बैठना होता है।  बालासन का अर्थ- बच्चे की तरह बैठने वाला योग अभ्यास का एक आसन है।

बालासन की स्थिति में हम माँ के गर्भ वाली स्थिति में आ जाते है। जैसे माँ के गर्भ में 9 महीने बच्चा जन्म लेने का इंतजार करता है, ठीक उसी तरीके से योग हमारे शरीर को बालासन में ले जाता है। बालासन का नियमित अभ्यास करने से हमारे शरीर को अनेकों फायदे मिलते हैं।

बालासन क्या है ?

योग के एक आसन का नाम बालासन है। जो एक साधारण स्तर का आसन है। इस आसन को विन्यास योग शैली का आसन माना जाता है। इस अभ्यास का अभ्यास करने से हमारे अपने नितंब, जांघ और टखनों में खिंचाव पैदा होता है। जिससे हमारी कमर, गर्दन व कंधे मजबूत होते हैं। इस आसन का अभ्यास 3-5 मिनट तक करना चाहिए। वैसे यह आसन विश्राम की एक मुद्रा है। इस मुद्रा में हमारा शरीर किसी माँ के गर्भ के शिशु जैसी स्थिति में रहता है। जिससे हमारे शरीर का दर्द दूर होता है।

इस आसन का अभ्यास गुरुत्वाकर्षण बल के विपरीत अपने शरीर पर जोर लगाते हुए किया जाए तो हमारा मन-मस्तिष्क आराम महसूस करता है। बालासन का अभ्यास तभी करना चाहिए जब आप आराम करना चाहते हों। इसलिए इस आसन का अभ्यास सोते समय या फिर योगा, वर्कआउट के बाद करें तो हमारे स्वस्थ के लिए लाभदायक रहता है।

बालासन के क्या लाभ है ?

बालासन के अभ्यास से हमारे शरीर में नई ऊर्जा आती है। यह आसन हमें शांति के साथ-साथ आराम व ताजगी भी देता है। इसके अभ्यास से हमारी रीढ़ और हमारे मांसपेशियों को आराम मिलता है। हमारे शरीर का दर्द भी दूर होता है। बालासन से हमारे पैरों की मांसपेशियाँ भी मजबूत होती है। इस आसन में हम एक भ्रूण की तरह रहते है। इसके लगातार अभ्यास से हमारे मन में सकारात्मक भावनाओं का संचार होता है और नकारात्मक विचारों का नाश होने लगता है। इसलिए हमें बालासन को नियमित करना चाहिए। बालासन से हमारी थकान दूर होती है। हमारे शरीर को भरपूर आराम मिलता है। बालासन से हमारे पेज के अंगों को आराम मिलता है। जिससे हमारे अंग अच्छे से काम करने लगते है। इस आसन का नियमित अभ्यास से हमारे शरीर में रक्त संचार सही से होता है।

बालासन का अभ्यास कैसे करें ?

योग के अलग-अलग आसनों में से एक बालासन भी है। जिस प्रकार हमें योगासन करते समय लंबी-लंबी सांस लेनी चाहिए, ठीक उसी प्रकार बालासन के अभ्यास के दौरान भी करना चाहिए। इस आसन का अभ्यास करने के दौरान से पहले आप लंबी-लंबी सांसें ले और छोड़ें। इसके बाद आप बालासन की मुद्रा में आएँ। अब धीरे-धीरे आप सांस ले और छोड़ें या क्रिया लगभग 3-5 मिनट तक करें। इस आसन को करने के लिए किसी स्थान पर योग मैट या दरी को बिछा लें। अब अपने घुटनों के बल बैठें, अपने दोनों टखनों और एड़ियों को आपस में मिलाएँ और धीरे-धीरे अपने घुटनों को बाहर की तरफ फैलाएँ। अब गहरी सांस लें और छोड़ें और अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। अपने कमर के पिछले हिस्से को चौड़ा करें और अपने कूल्हों को सिकोड़ते हुए अपनी नाभि की तरफ खींचें। अब अपने सिर को गर्दन से उठाने की कोशिश करें। अब अपने हाथों को सामने की तरफ लाएँ और घुटनों के सीध में रखें। अब अपने कंधों को जमीन से छुआने  का प्रयास करें। इस दौरान आपको खिंचाव महसूस होगा। इस दौरान धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें। अब धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में आ जाएँ। हाँ बालासन अभ्यास का समय सुनिश्चित करें और खुली पेट इस आसन का अभ्यास करें। अगर आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैंं, तो चिकित्सक की सलाह पर ही इस आसन का अभ्यास करें। अगर आपको झुकने में तकलीफ़ होती है तो आप मोटी दरी का प्रयोग कर सकते है। योगासनों के सही अभ्यास के लिए हमारे eka Meditation ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें।        

बालासन योग क्रिया का सबसे अच्छा और एक साधारण योगासन है। इस योगासन के अभ्यास से आप अपने अंदर छिपे बच्चे को बाहर ला सकते है। यह आसन हमारे शरीर में खिंचाव लाता है और हमें आराम देता है। यह हमें मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है। इसके अभ्यास से हमारे घुटने व कमर मजबूत होती है। इससे हमारे शरीर को संपूर्ण विश्राम मिलता है। 

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