तंत्र शब्द का अर्थ- एक व्यवस्था है। तंत्र योग के अनुसार हमारा शरीर एक व्यवस्था है। हमारी शरीर भौतिक कार्यों का केंद्र है। इसलिए इसे तृप्त और स्वस्थ रखना और शरीर की क्षमता को बढ़ाता अत्यंत जरूरी है। हमें अपने शरीर के माध्यम से ही अध्यात्म को प्राप्त कर सकते है। हाँ जो व्यक्ति मांस, मदिरा और संभोग जैसे घोर कर्म में लिप्त है, वह कभी भी तांत्रिक नहीं बन सकता है। हमारी तांत्रिक साधना का मूल उद्देश्य सिद्धि से अपना आत्मा साक्षात्कार करना है। तंत्र योग का वर्णन अर्थवेद में पाया जाता है। तंत्र शास्त्र मुख्यतः तीन भागों में विभक्त हैं- आगम तंत्र, यामल तंत्र, मुख्य तंत्र। जिस तंत्र में देवताओं की पूजा, साधन, सृष्टि प्रलय का वर्णन हो वह आगम तंत्र कहलाता है। जिसमें ज्योतिष, नित्य कृत्य, सूत्र और वर्णभेद, युगधर्म का वर्णन हो उसे यामल कहते है। इसी तरह जिसमें लय, मंत्र, तीर्थ, कल्प, दानधर्म, व्रतकथा और आध्यात्म का वर्णन हो वह मुख्य तंत्र माना जाता है। तंत्र शब्द को तिब्बती भाषा में ऋगयुद कहा जाता है। 

तंत्र योग में बहुत विद्याएं मिलती हैं। इसके माध्यम से  हम अपनी आत्मशक्ति का विकास कर सकते है। तंत्र योग से ही त्रिकाल, इंद्रजाल, अपरा और प्राण विद्या का जन्म हुआ है। हमने तंत्र योग को गलत तरीके से जाना और समझा है। तंत्र योग को लोगों ने अपनी हवस की भूख में आध्यात्मिक रंग पहनाया है, जो सरासर गलत है। आप अध्यात्म को अपनी  गलत सोच और तरीकों से बर्बाद ना करें। इससे तंत्र योग के बारे में लोगों में गलत धारणा बनती है। 

तंत्र योग हमें नीचे से ऊपर उठा सकता है और ऊपर से नीचे गिरा सकता हैं। जब हम भोजन, नशा और अय्याशी में डूब जाते हैं, तो हमारा जीवन अंधकार की ओर जाने लगता है। इसलिए हमें इन चीजों से दूर और अपने जीवन को अनुशासित बनाने की जरूरत है। इस अनुशासन पर हमारे लिए चलना बहुत मुश्किल है, इसलिए हमें इसकी धीरे-धीरे कोशिश करनी चाहिए।

तंत्र का मतलब है- अपने कार्यों को पूर्ण करने के लिए अपनी ऊर्जा का पूर्ण रूप से इस्तेमाल करना और अपने मस्तिष्क को मजबूत बनाकर अपना कार्य पूर्ण करना है। जब हम किसी से प्रेम करते है और उसके खातिर हम अपनी ऊर्जा को अपने दिल में उतारते हैं, तो वह भी एक प्रकार से तंत्र ही कहलाता है। इतना ही नहीं जब हम अपने भौतिक शरीर को अपने कार्यों के लिए शक्तिशाली बना लेते है, तो यह भी तंत्र कहलाता है। हमारी ऊर्जा हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क को स्वस्थ बनाती है।

तंत्र योग किसी भी प्रकार का अजूबा नहीं है। तंत्र योग हमारी एक खास काबिलियत है, जिसके बिना संपूर्ण ब्रह्मांड में कुछ भी संभव नहीं है। इसलिए तंत्र योग को हमें गलत तरीके से नहीं देखना चाहिए और ना ही इसको हमें गलत तरीकों से अपनाना चाहिए। कर्म योग और ध्यान क्रिया को और विस्तार से जानने के लिए eka Meditation ऐप्प को डाउनलोड करें। 

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