तनाव या चिंता (Stress) क्या हैं, और इससे मुक्ति पाने के लिए क्या करना चाहिए?

Stress-meditation

भागदौड़ भरी जिन्दगी और उसमे पहले स्थान पर बने रहने की होड़ ने हमारे अंदर एक तनाव का माहौल बना दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में युवाओं के अंदर सबसे अधिक तनाव है। हमे पता होता है की हम तनाव में हैं लेकिन उससे निकलने का कोई पुख्ता इलाज हमारे पास नहीं होता है क्योकि हम इसके बारे में नहीं जानते हैं। तनाव को दूर करने का सबसे बेहतर तरीका (stress door karne ke upay) है मेडिटेशन लेकिन इसे करना हमे नहीं आता। आइये जानते हैं तनाव यानी की stress kya hai, इसके कारण, प्रकार और इलाज-

तनाव क्या है (Stress kya hai):

तनाव एक प्रतिक्रिया या व्यवहार है जो परिवर्तन के कारण पैदा होता है। किसी चीज को लेकर इतना अधिक सोचना जो की जरूरी नहीं है या फिर एक ही काम को लेकर अंदर ही अंदर गुस्सा करना और बेवजह की बातें सोचना तनाव कहलाता है। किसी विशेष घटना पर आप ऐसे व्यव्हार करने लगे की जैसे आपका इससे बहुत नुकसान है। उस नुकसान के डर से आपके दिमाग की नसे फटने के कगार पर आ जाएँ और आप गुस्सा करने लगे। यानि तनाव है।

तनाव के कारण (Stress ke karan)- हमे तनाव क्यों होता है और क्यों ये हमारे शरीर में हावी होने लगता है इसके लिए आपको जानना होगा की तनाव की वजह यानी की stress ka karan क्या है:

तनाव क्या है (Stress kya hai)
  • बाह्य कारण

Stress यानी की तनाव का बाह्य कारण है जब चीजे हमारे हिसाब से नहीं हो रही होती हैं। जैसे घर, दफ्तर या जीवन में जब काम हमारे मन में मुताबिक या फिर हमारे प्लान के हिसाब नहीं हो रही होती हैं तो हम तनाव में चले जाते हैं। दफ्तर में नुकसान, बच्चे की तबियत खराब होना, गाड़ी का खराब होना, बॉस का बुरा भला कहना आदि कारण। ये सब बाह्य कारण हैं जो कि तनाव के लिए जिम्मेदार हैं। इन कारणों को आप कई बार नहीं बदल सकते हैं क्योकि इसमें दूसरे भी शामिल होते हैं। इससे आपके हाथ में सबकुछ या फिर इसे रोकना नहीं होता है।

  • आंतरिक कारण

ये सबसे बड़ी वजह है तनाव की जो की लगभग 41% लोगो के तनाव की वजह है। अपने अंदर की भावनाओं, उम्मीदों और आकांक्षाओ में कण्ट्रोल ना रख पाना। जब हमारे मन की भावनाएं कण्ट्रोल नहीं हो पा रही होती हैं तो ऐसे में हमारे शरीर में तनाव बढने लगता है। किसी से अधिक उम्मीद, मन में कोई विशेष प्लान, या फिर उम्मीदों पर खरा ना उतरने पर तनाव होता है। हम इन्हें रोक सकते हैं मेडिटेशन की सहायता से।

  • तीसरा जो हम समझ नहीं पाते

तीसरा सबसे बड़ा कारण है बेवजह का असंतोष। कई सारे मनोवैज्ञानिक कहते हैं की बेवजह का असंतोष हमारे जीवन में तनाव की वजह बनता है। हम अपने आसपास हो रही चीजो और क्रियाओं से संतुष्ट नहीं है और हमे लगता है की ये बदल जानी चहिये लेकिन हम बदल नहीं पाते हैं। ऐसे में तनाव बढने लगता है और हावी हो जाता है। ये भी तनाव की एक सबसे बड़ी वजह है।

तनाव के लक्षण (stress ke lakshan)- तनाव के लक्षण जब किसी शख्स के अंदर होते हैं तो हम समझ भी पाते है और नहीं भी। यहाँ तक की कुछ लोग खुद कहते हैं की उनका तनाव डिप्रेशन में बदल गया लेकिन वो समझे नहीं। इसके लिए जरूरी है की हम तनाव के लक्षणों के बारे में बारीकी से जाने-

  • गुस्सा चिड़चिड़ापन

अगर आपको छोटी छोटी बातों में बहुत अधिक गुस्सा आ रहा है या फिर आप पहले से अधिक चिडचिडा रहे हैं तो आप तनाव में हैं। इसमें आप दांत पीसने लगते हैं या फिर तेज से चिल्लाने लगते हैं।

  • बिना मतलब की बातें

कई बार जब इंसान को बहुत अधिक तनाव हो जाता है तो वो बहकी बातें करने लगता है। ऐसी बातें जिनका कोई औचित्य नहीं होता है। अगर आपके साथ ऐसा है तो आप तनाव में हैं।

  • खाना नहीं

तनाव जैसे ही हम पर हावी होता है वैसे ही सबसे पहले हमारी भूख मरती है। अगर आप कम खा रहे हैं तो समझ लीजिए की तनाव भी एक वजह हो सकता है।

  • अनिंद्रा

कम सोना यानी की अनिंद्रा होने पर आप समझिये की आपको तनाव है। आपको नींद नहीं आती, आप रात-रात भर जागते रहते है और ऐसे में आपका स्वास्थ खराब होता है। ये तनाव के लक्षण हैं।

तनाव के प्रकार (type of strees in hindi)- बहुत कम लोग जानते होंगे की stress के types कौन-कौन से हैं। आइये जानते हैं types of stress in hindi-

  • टाइम स्ट्रेस

जब आप समय के बारे में सोचकर अधिक तनाव लेते हैं उसे टाइम स्ट्रेस कहा जाता है। किसी काम को समय में खत्म करने का तनाव, किसी के समय में आने या चले जाने का तनाव आदि टाइम स्ट्रेस कहलाता है।

  • एंटीसिपेट्री स्ट्रेस

जब हम भविष्य की बातें सोचकर उसके बारे में तनाव लेने लगते हैं तो इसे एंटीसिपेट्री स्ट्रेस कहते हैं। ऑफिस में कोई प्रेजेंटेशन देना है या फिर बच्चो के भविष्य की या फिर अपने नौकरी की चिंता।

  • सिचुएशनल स्ट्रेस

जब आप किसी स्थित को नियंत्रण नहीं कर पाते हैं तो ऐसे में आपको गुस्सा आता है और तनाव होता है जिसे आप सिचुएशनल स्ट्रेस कहते हैं।

तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन (meditation for stress):

तनाव कम करने के लिए सबसे बेहतर तरीका (stress treatment) है मेडिटेशन जो की हमे अपनाना चहिये। इससे मन शांत होता है और तनाव कम होता है।

क्या है मेडिटेशन – एक विशेष अवस्था में बैठकर मन को शांत करने की प्रक्रिया को मेडिटेशन या ध्यान कहते हैं। इससे आपके अंदर की भावनाएं, विचार आदि सब कण्ट्रोल होने लग जाता है। तनाव से ग्रसित इंसान को रोजाना मेडिटेशन करना चहिये। इसे ऐसे करें-

  • सबसे पहले शांत मुद्रा में बैठ जाएँ यानी की सुखासन में बैठे जिसे की आलथी-पालथी मारकर बैठना कहते हैं।
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को अपने दोनों घुटनों के ऊपर रखते हुए ध्यान की मुद्रा में आ जाएँ।
  • कमर को पूरी तरह से सीधा कर लें।
  • अब आंखे बंद करें और जो चल रहा है उसे देखने की कोशिश करें।
  • इसके बाद एक गिनती शुरू करें दस से लेकर एक तक। एक भारी सांस खीचे और उसे छोड़ते हुए बोले दस, इसके बाद दूसरी भारी सांस लें और उसे छोड़ते हुए बोले नौ, इसके बाद शून्य तक ऐसे ही करते आये।
  • अब आपको जो दिखाई दे रहा है वही देखें। आँखों के सामने जो है उसमे खो जाएँ। किसी सेकंड आपको एक ऐसी चीज दिखेगी या ऐसी ध्वनि सुनाई देगी जो की आपके मन को खुश कर देगी।
  • जितनी देर तक आप इस अवस्था में रह सकते हैं रहें।

ये बातें ध्यान रखें- (Meditation kaise Karen)

  • मेडिटेशन से पहले कानो में इयरबट्स लगा लें जिससे बाह्य आवाज अंदर ना जाये।
  • ऐसे ना बैठे की शरीर के किसी हिस्से में दर्द होने लग जाए। इससे आपका ध्यान मेडिटेशन में नहीं बल्कि आपके दर्द में होगा।
  • अगर मेडिटेशन के वक्त सर के बीचो-बीच यानी की दोनों आँखों के बीच दर्द हो रहा है तो आप कुछ देखने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ न देखे जो दिख रहा है वही सबसे बेहतर है।
  • आँखे बंद हो तो सामने भगवान् की मूर्ती, कोई दृश्य जबरन देखने का प्रयास ना करें।
  • मेडिटेशन तभी करें जब आपके पास पर्याप्त समय हो।

तो ये हैं तनाव से निपटने के तरीके और उसके कारण लक्षण। तनाव अपने आप में एक ऐसी बीमारी है जिससे ग्रसित होने पर लोग पहचान नहीं पाते हैं। आप इसे पहचाने और मेडिटेशन की सहायता से इसे दूर करें।

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