जरा आप भी जानिए सूर्य नमस्कार क्या है ?

योग शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में सबसे पहले सूर्य नमस्कार आता है। सूर्य नमस्कार का अर्थ है- सूर्य को मन से अर्पण करना या नमस्कार करना है। सूर्य नमस्कार हमारे शरीर को स्वस्थ और हमारे मन को शांत रखने में सबसे उपयोगी और उत्तम तरीका है। सूर्य नमस्कार में 12 योग आसनों का समन्वय हैं, जो सबसे अच्छा व स्वस्थ के लिए लाभदायक व्यायाम माना जाता है। सूर्य नमस्कार का नियमित रूप से अभ्यास करना हमारे शरीर के लिए लाभदायक होता है।

अगर आप अपने शरीर के सही से आराम नहीं दे पा रहे हैं व आप स्वस्थ रहने के लिए योग अभ्यास करना चाहते है, मगर आपके पास पर्याप्त समय नहीं है, तो इसके लिए आपके पास सूर्य नमस्कार व योग निंद्रा का सबसे अच्छा विकल्प है। जहाँ सूर्य नमस्कार सबसे प्रभावशाली योग क्रियाओं में गिना जाता है, तो वहीं मेडिटेशन का नियमित अभ्यास हमें स्वस्थ रखने में सहायता करता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य नमस्कार का अभ्यास सुबह खाली पेट करना सबसे उचित रहता है।

आइए स्वस्थ जीवन जीने के लिए सूर्य नमस्कार के प्रभावशाली आसनों के बारे में जानते हैं- सूर्य नमस्कार के 12 चरणों के दो क्रम होते हैं। योग के 12 आसनों के एक क्रम को सूर्य नमस्कार कहते है। जिसमें पहले चरण के दूसरे क्रम में आसनों को दोहराना पड़ता है। बस दाहिने पैर के स्थान पर बाँए पैर का उपयोग किया जाता है। वैसे सूर्य नमस्कार के विभिन्न प्रारूप पाए जाते हैं, आपके और हमारे लिए यहीं अच्छा होगा कि हम किसी एक प्रकार का अनुसरण को अपनी दिनचर्या में शामिल कर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ।

अगर आप अच्छा व स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं, तो आपको अपने दिनचर्या में सूर्य नमस्कार व मेडिटेशन को शामिल करना चाहिए। आज स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमारे पास सिर्फ योग व मेडिटेशन एक मात्र विकल्प है। जिसके लिए हमें नियमित रूप से मेडिटेशन व सूर्य नमस्कार के अभ्यास को नियमित रूप से अपनाने की जरूरत है। मगर ध्यान रहें कि मेडिटेशन व सूर्य नमस्कार का असर हमारे शरीर पर धीरे-धीरे होता है। हमें सबसे पहले सूर्य नमस्कार का अभ्यास करना चाहिए। इसके बाद हमें मेडिटेशन में बैठना चाहिए। योग निंद्रा के दौरान आप किसी शब्द या मंत्र का उच्चारण भी कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार के 12 आसन कुछ इस प्रकार हैं-

1- प्रणाम आसन

2- हस्तउत्तानासन

3- हस्तपाद आसन

4- अश्व संचालन आसन

5- दंडासन

6- अष्टांग नमस्कार

7- भुजंग आसन

8- पर्वत आसन

9- अश्वसंचालन आसन

10- हस्तपाद आसन

11- हस्तउत्थान आसन

12- ताड़ासन

आइए सूर्य नमस्कार की विधि जानते हैं- सबसे पहले आप अपने मैट या किसी खाली स्थाप पर खड़े हो जाएँ। इसके बाद प्रणाम आसन में अपने पंजों को एक साथ जोड़ कर रखें। इस दौरान अपना पूरा वजन अपने पैरों पर रखें। धीरे-धीरे अपनी छाती फुलाएँ और अपने कंधे ढ़ीले रखें। अब सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर उठाएँ फिर सांस छोड़ते हुए और हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम की अवस्था में आएँ। अब सांस लेते हुए हस्तउत्तानासन में आते हुए अपने हाथों को ऊपर उठाएँ और पीछे ले जाएँ। इस दौरान अपने हाथों को अपने कान के समीप रखें। इस मुद्रा में अपने पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचने का प्रयास करें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए हस्तपाद आसन में आएँ। इस दौरान अपनी रीढ़ को सीधे रखते हुए अपने कमर से आगे झुकें। अब सांस छोड़ते हुए अपने दोनों हाथों को अपने पंजों के पास ले जाएँ। इस दौरान आप अपने घुटनों को मोड़ सकते हैं। हाँ आप धीरे-धीरे अपने घुटनों को सीधे रखने का प्रयास कर सकते है। अब सांस लेते हुए अश्व संचालन मुद्रा में जाएँ। इस दौरान अपने दाएँ पैर को पीछे ले जाएँ और अपने घुटने को जमीन पर रख सकते हैं। ध्यान रहें इस मुद्रा में आपकी नजर ऊपर की ओर हो। अब सांस लेते हुए बाएँ पैर को पीछे ले जाएँ और अपने पूरे शरीर को सीधी रेखा में रखते हुए दंडासन में ले जाएँ। अब धीरे-धीरे अपने दोनों घुटनों को जमीन पर लाएँ और अपनी साँस छोड़ें। इस दौरान अपने कूल्हों को पीछे ऊपर की ओर उठाएँ और अपने शरीर को आगे की ओर खिसकाएँ। अब अपनी छाती व अपने ठुड्डी को जमीन को छुते हुए अष्टांग नमस्कार करें। ध्यान रहे इस दौरान आपके शरीर के आठ अंग यानि दो पैर, दो हाथ, दो घुटने, अपनी छाती और ठुड्डी जमीन से छुएँ। अब धीरे-धीरे आगे की ओर सरकते हुए भुजंगासन में अपनी छाती को ऊपर उठाएँ। इस दौरान अपने कंधों को अपने कानों से दूर रखें और अपनी नजर को ऊपर की ओर ऊठाएँ। अब सांस लेते हुए अपनी छाती को आगे की तरफ धकेलने का प्रयास करें। सांस छोड़ते हुए अपनी नाभि को सहजता से नीचे की ओर दबाएँ और पैरों की उंगलियों को भी नीचे की तरफ दबाएँ। इस क्रिया को अपनी सुविधानुसार करें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपने कूल्हों और रीढ़ के निचले भाग को ऊपर उठाएँ साथ ही अपनी छाती के नीचे झुकाते हुए उल्टा वी बनाते हुए पर्वत आसन में आएँ। इस दौरान अपनी एड़ियों को जमीन पर रखें और अपने रीढ़ को ऊपर उठाने का प्रयास करें। सांस लेते हुए अपनी दाएँ पैर को अपने दोनों हाथों के बीचे ले जाएँ और अपने घुटनों को जमीन पर रखें। इस दौरान अपनी नजर को ऊपर की ओर रखें। हाँ अपने दाएँ पंजे को दोनों हाथों के बीच में रखें और दाहिनी पिंडली को जमीन पर रखें। इस दौरान अपने कूल्हों को नीचे की ओर जाने दें। इस मुद्रा में आप खिंचाव को अनुभव करेंगे। अब सांस छोड़ते हुए अपने बाएँ पैर को आगे लाते हुए हस्तपाद आसन में आएँ। इस दौरान अपनी हथेलियों को जमीन पर ही रहने दें। अपनी जरूरत के अनुसार अपने घुटनों को मोड़ सकते हैं। गहरी सांस लेते हुए अपने रीढ़ को ऊपर लाएँ और धीरे-धीरे अपनें हाथों को ऊपर व पीछे की ओर ले जाते हुए हस्तउत्थान आसन में आएँ। अब धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए अपने शरीर को सीधा करें और अपने हाथों को नीते लाते हुए ताड़ासन में आएँ। इस मुद्रा में अपने शरीर को थोड़ा आराम देते हुए और उसकी संवेदनाओं के प्रति सजगता लाने का प्रयास करें।

हम उम्मीद करते हैं- हमारे द्वारा सूर्य नमस्कार की विधि आपको सही से समझ में आई होगी और आप सूर्य नमस्कार और मेडिटेशन का अभ्यास जल्द ही शुरू करेंगे।  

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