आप भी जानिए तंत्र योग क्या है – Tantra Yoga in Hindi

Tantra Yoga in Hindi: तंत्र शब्द का अर्थ क्या है- तंत्र योग एक व्यवस्था है। तंत्र योग के अनुसार हमारा शरीर एक व्यवस्था है। हमारी शरीर भौतिक कार्यों का केंद्र है। इसलिए इसे तृप्त और स्वस्थ रखना और शरीर की क्षमता को बढ़ाता अत्यंत जरूरी है। हमें अपने शरीर के माध्यम से ही अध्यात्म को प्राप्त कर सकते है। हाँ जो व्यक्ति मांस, मदिरा और संभोग जैसे घोर कर्म में लिप्त है, वह कभी भी तांत्रिक नहीं बन सकता है।

तंत्र योग क्या है – Tantra Yoga in Hindi

हमारी तांत्रिक साधना का मूल उद्देश्य सिद्धि से अपना आत्मा साक्षात्कार करना है। तंत्र योग का वर्णन अर्थवेद में पाया जाता है। तंत्र शास्त्र मुख्यतः तीन भागों में विभक्त हैं- आगम तंत्र, यामल तंत्र, मुख्य तंत्र। जिस तंत्र में देवताओं की पूजा, साधन, सृष्टि प्रलय का वर्णन हो वह आगम तंत्र कहलाता है।

जिसमें ज्योतिष, नित्य कृत्य, सूत्र और वर्णभेद, युगधर्म का वर्णन हो उसे यामल कहते है। इसी तरह जिसमें लय, मंत्र, तीर्थ, कल्प, दानधर्म, व्रतकथा और आध्यात्म का वर्णन हो वह मुख्य तंत्र माना जाता है। तंत्र शब्द को तिब्बती भाषा में ऋगयुद कहा जाता है। 

तंत्र योग में बहुत विद्याएं मिलती हैं। इसके माध्यम से  हम अपनी आत्मशक्ति का विकास कर सकते है। तंत्र योग से ही त्रिकाल, इंद्रजाल, अपरा और प्राण विद्या का जन्म हुआ है। हमने तंत्र योग को गलत तरीके से जाना और समझा है। तंत्र योग को लोगों ने अपनी हवस की भूख में आध्यात्मिक रंग पहनाया है, जो सरासर गलत है। आप अध्यात्म को अपनी  गलत सोच और तरीकों से बर्बाद ना करें। इससे तंत्र योग के बारे में लोगों में गलत धारणा बनती है। 

तंत्र योग हमें नीचे से ऊपर उठा सकता है और ऊपर से नीचे गिरा सकता हैं। जब हम भोजन, नशा और अय्याशी में डूब जाते हैं, तो हमारा जीवन अंधकार की ओर जाने लगता है। इसलिए हमें इन चीजों से दूर और अपने जीवन को अनुशासित बनाने की जरूरत है। इस अनुशासन पर हमारे लिए चलना बहुत मुश्किल है, इसलिए हमें इसकी धीरे-धीरे कोशिश करनी चाहिए।

Tantra Yoga in Hindi – तंत्र योगा कैसे करते है

अपने कार्यों को पूर्ण करने के लिए अपनी ऊर्जा का पूर्ण रूप से इस्तेमाल करना और अपने मस्तिष्क को मजबूत बनाकर अपना कार्य पूर्ण करना है। जब हम किसी से प्रेम करते है और उसके खातिर हम अपनी ऊर्जा को अपने दिल में उतारते हैं, तो वह भी एक प्रकार से तंत्र ही कहलाता है। इतना ही नहीं जब हम अपने भौतिक शरीर को अपने कार्यों के लिए शक्तिशाली बना लेते है, तो यह भी तंत्र कहलाता है। हमारी ऊर्जा हमारे शरीर, मन और मस्तिष्क को स्वस्थ बनाती है।

तंत्र योग किसी भी प्रकार का अजूबा नहीं है। तंत्र योग हमारी एक खास काबिलियत है, जिसके बिना संपूर्ण ब्रह्मांड में कुछ भी संभव नहीं है। इसलिए तंत्र योग को हमें गलत तरीके से नहीं देखना चाहिए और ना ही इसको हमें गलत तरीकों से अपनाना चाहिए।

तंत्र योग के फायदे | Tantra Yoga in Hindi

1. शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल: यह शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है जैसे कि मांसपेशियों को मजबूत करना, शारीरिक लचीलापन बढ़ाना, और ऊर्जा स्तर को बढ़ाना।

2. मानसिक स्थिरता: तंत्र योग की प्रायोगिक अभ्यास से मानसिक स्थिरता में सुधार हो सकता है। यह मानसिक तनाव को कम करने, मानसिक शांति और स्थिरता को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

3. आत्म-समर्पण: यह आत्म-समर्पण और आत्म-परिश्रम की भावना को प्रोत्साहित करता है, जिससे आत्मा की उन्नति हो सकती है और व्यक्ति अपने जीवन को एक उच्च स्तर पर जी सकता है।

4. आध्यात्मिक विकास: तंत्र योग आध्यात्मिक विकास को प्रोत्साहित करता है और व्यक्ति को अपनी आत्मा के साथ एक गहरा संबंध अनुभव करने में मदद करता है। इससे उन्नति की प्रक्रिया में सहायता मिलती है।

इन फायदों के अलावा, तंत्र योग व्यक्ति को समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है और उसकी जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक हो सकता है।

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